दो दिवसीय कार्यशाला में शिक्षकों ने नई शिक्षा नीति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर रखे अपने विचार




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  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित शैक्षिक कार्यशाला संपन्न

मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला शिक्षा का रविवार को समापन हो गया। दो दिन तक चली इस कार्यशाला में शिक्षकों ने अपने अपने विचार रखे और नई शिक्षा नीति क्यों जरूरी ये बताया।

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की पूर्व प्रो. वाइस चांसलर डॉ वाई विमला ने अपने संबोधन में कहा कि हमें समर्पण भाव से अपने कार्य को करना चाहिए। मोह भी करें लेकिन अपने दायित्व का निर्वहन भी करें। उन्होंने कहा कि हमारी अंतरात्मा कभी गलत कार्य करने के लिए प्रेरित नहीं करती है, लेकिन हम उससे हटकर कार्य करते हैं, इससे हमें बचाना चाहिए। उन्होंने बताया सफलता बुलाई नहीं जाती कार्य करने और दृढ़ संकल्प से आती है।

डॉ योगेंद्र सिंह सहसंयोजक शिक्षा सेवा उत्थान न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को भारतीयता के लिए खड़ा करना होगा। उसी काम में सभी लोग लगे हुए हैं। भारत हमेशा से सम्पन्न था। भारतीयता हर कार्य चाहे शिक्षा हो स्वस्थ हो व्यापार हो कृषि हो सभी में अनुशासन आधारित था। सिंधु घाटी की सभ्यता हो, वैदिक युग हो, रामायण काल हो, महाभारत काल हो, भारत हर क्षेत्र में समृद्ध था। डॉ योगेंद्र ने शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के 10 विषयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चरित्र निर्माण व्यक्तित्व के समग्र विकास पर चर्चा की।

डॉ सुबोध शर्मा ने न्यास के कार्यों की संकल्पना आयाम कर और विभाग के बारे में चर्चा की। प्रोफेसर हरेंद्र सिंह ने कार्यकर्ता निर्माण एवं कार्यकर्ता नियोजन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।
प्रोफेसर वाचस्पति मिश्रा संस्कृति विभाग चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में शिक्षा में संस्कृति के महत्व की जानकारी दी और भारतीयता ज्ञान परंपरा और उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।

मुख्य वक्ता जगराम जी संयोजक उत्तर क्षेत्र एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों और उसकी उपयोगिता के बारे में चरित्रवान कार्यकर्ता निर्माण कैसे हो और कार्यों को कैसे संपन्न किया जाए इसके बारे में मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हेतु अच्छे शिक्षकों का होना आवश्यक है। शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों के समय में शिक्षक का कार्य अपेक्षित है। ऐसे में यदि शिक्षक शिक्षा का पाठ्यक्रम दोषपूर्ण होगा तो उसे अच्छे शिक्षक कभी भी तैयार नहीं हो सकते। इस हेतु न्यास ने इस आधारभूत विषय पर काम करना आरंभ किया है। शिक्षक शिक्षा के पाठ्यक्रम में व्यवहारिकता भारतीयता एवं छात्रों के व्यक्तित्व के समग्र विकास का समावेश करके देश भर में शिक्षक शिक्षा के विद्वान आचार्य को एकत्र कर यशालाओं का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि कार्यशालाओं से प्राप्त सुझावों के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने का कार्य भी किया जा रहा है।

कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर शैलेंद्र सिंह गौरव योग एवं प्राणायाम डॉ नवजोत सिद्धू पंचकोश का व्यावहारिक प्रशिक्षण एडवोकेट मनु गोस्वामी द्वारा किया गया। कार्यक्रम धन्यवाद प्रस्ताव डॉक्टर वीरेंद्र कुमार तिवारी द्वारा दिया गया। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर राकेश सिंह सेंगर, प्रोफेसर डीबी सिंह, डॉ देश दीपक, डॉ नीलेश कपूर, डॉ शालिनी गुप्ता, डॉ जितेंद्र सिंह, डॉक्टर सीमा जैन, मनु गोस्वामी आदि ने अपना सहयोग दिया।



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